Wednesday, September 23, 2020

गांधीजी की बुनियादी शिक्षा

बुनियादी शिक्षा: आत्मनिर्भरता की शिक्षा महात्मा गांधी

  बुनियादी शिक्षा का मूल आधार संस्कृति का निर्माण है और गांधीजी के अनुसार संस्कृति मानव आत्मा का एक गुण है, जो उसके समस्त व्यवहारों में व्याप्त रहता है। सच्ची शिक्षा से ही सच्चा ज्ञान हो सकता है और सच्चा ज्ञान की प्राप्ति के लिए कर्म के माध्यम से शिक्षा देना अनिवार्य है, जिसमें मानव के हस्त कौशल के विकास के साथ-साथ बुद्धि और आत्मा का विकास होता है।
                           उन्होंने कहा है "मैं यह मानता हूं कि मस्तिष्क और आत्मा का सर्वोच्च विकास शिक्षा की इस व्यवस्था (हस्त कर्म) से संभव है। जरूरत यह है कि हस्त कर्म की शिक्षा को आज की भांति यांत्रिक तरीके से ना देकर वैज्ञानिक पद्धतियों से दी जाए, अर्थात बच्चे को "क्यों" और "कैसे" का ज्ञान प्रतिक्रिया के लिए मालूम होना चाहिए।
                             आत्मनुभव तथा ईश्वर साक्षात्कार के लिए आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक स्वतंत्रता साधन मात्र है। ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोत्तम साधन दीन दुखियों की सेवा है।
                            गांधी जी की शिक्षा के सिद्धांत की सबसे प्रमुख विशेषता समवाय पद्धति का समर्थन है। नई तालीम में समवाय पद्धति के द्वारा शिक्षा का विधान किया जाता है। समवाय पद्धति शिक्षण और जीवन की प्रक्रिया को दो नहीं मानकर एक अखंड जीना सिखाता है। गांधी जी ने यह अनुभव किया कि शिक्षा जिसका जीवन के किसी पहलू के साथ अनुबंध ना हो, इसलिए उन्होंने शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति का प्रकृति, पड़ोस, पेट तथा परमात्मा के साथ अनुबंध स्थापित करने का प्रयास किया। इस प्रकार की शिक्षा में व्यक्ति का सीधा संबंध व्यक्तिगत, सामाजिक, प्राकृतिक और आध्यात्मिक जीवन से होता है। अतः शिक्षा समग्र जीवन का रूप ले लेती है। सामवाय पद्धति ज्ञान-कर्म का आपस में मिल स्थापित किया जाता है।
         गांधीजी के अनुसार मानव-व्यक्तित्व, शरीर, मस्तिष्क और आत्मा का सामंजस्य पूर्ण संगठन या समवाय है। जिस प्रकार मानव चैतन्य के चिंतन,भावना तथा इच्छा त्रिविध रूप है, उसी प्रकार प्रतीक आज के संपादन में भी उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलू होते हैं। मनुष्य जब अपने चैतन्य के त्रिविध पहलू के साथ क्रिया के तीनों पहलुओं का संतुलन कर पाता है, तभी उसका व्यक्तित्व उन्नत होता है। अर्थात प्रिया से अलग न तो बुद्धि का विकास संभव है और न तो बुद्धि विवेक की बिना कर्म ही संपन्न हो सकता है, उन्होंने कहा है कि "वास्तविक बौद्धिक-शिक्षा शारीरिक अंगों जैसे हाथ, पैर, आंख, कान, नाक इत्यादि के समुचित अभाव तथा प्रशिक्षण के द्वारा ही प्राप्त हो सकती है। दूसरे शब्दों में शारीरिक अंगों के विवेकपूर्ण, व्यवहार से बच्चों में सबसे तीव्र और सर्वोत्तम बौद्धिक विकास होता है, परंतु जब तक शरीर, मस्तिष्क और आत्मा का विकास एक साथ नहीं हो जाता तब तक केवल बौद्धिक विकास एकांगी ही माना जाएगा।

गांधीजी के अनुसार बुनियादी शिक्षा क्या है?


                             गांधीजी के अनुसार स्वालंबन बुनियादी शिक्षा की सूची कसौटी है। इसके बिना शोषण मुक्ति का कार्य नहीं हो सकता।अतः शुरु से ही बच्चों में इस भावना का विकास होना आवश्यक है। क्रियात्मक शिक्षा से आत्मनिर्भरता की भावना का विकास होता है जिससे जीव का भी मिलती है तथा बच्चों में जागृति होती है और आत्मविश्वास की भावना स्कूल और उद्योग का आपस में संयोग होने से शिक्षण संस्थाओं सरकार तथा पूंजीपति के नियंत्रण से स्वतंत्र होकर स्वावलंबी बन सकती है परंतु इसका अर्थ यह नहीं है कि गांधीजी बुनियादी शिक्षा के द्वारा केवल आर्थिक स्वतंत्रता प्राप्त करना चाहते हैं। वास्तव में इसके अंतर्गत एक क्रांतिकारी विचार का तत्व भरा है, जो सामाजिक परिवर्तन का वाहक बन सकता है। आचार्य जी. बी. कृपलानी ने ठीक ही तो कहा है कि "प्रस्तावित नई तालीम का लक्ष्य विद्यार्थियों में हस्तकर्म के द्वारा यांत्रिक तरीके से आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करना नहीं है। यहां जो प्रस्तावित किया गया है वह इससे भिन्न तथा क्रांतिकारी है, जिसमें शोरूम के उचित महत्व और विनम्र इमानदारी पर आधारित और जीविका का विधान तो किया गया है, परंतु यह इससे भी आगे जाता है, जिसका प्रयोग पहले नहीं हुआ था। इस तरह ऐसा प्रतीत होता है कि गांधीजी की नई शिक्षा पद्धति जिसमें स्कूल और उद्योग दोनों का समन्वय है जो लागू किया जाएगा तो समाज में व्याप्त हर तरह की विषमता दूर होगी सामाजिक न्याय स्थापित करने में मदद मिलेगी। अब तो हम कह सकते हैं कि गांधीजी के सामाजिक न्याय सर्वोदय की प्राप्ति के लिए कोई तालीम की महत्वपूर्ण भूमिका है।

जैव-मंडल में पायी जाने वाली विविधताएं

जैव-मंडल

 जिस प्राकृतिक स्थल में जीव जंतु तथा वनस्पतियों का समूह हो, वह स्थान जैव  मंडल कहलाता है l

FUNA :   जिस प्राकृतिक स्थल में केवल जीव जन्तुओ का समूह हो उसे FUNA कहते हैं l

FLORA :  जिस प्राकृतिक स्थल में केवल वनस्पतियों का संभव हो उसे FLORA कहते हैं l

 जैवमंडल (Bio sphere) मंडल जहां जीव जंतु और वनस्पतियां दोनों हो वह स्थान जैव मंडल कहलाता है l

जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र : जिस प्राकृतिक स्थल में विशेष जीव जंतु एवं वनस्पतियों की प्रजाति में संकट हो, या समाप्त हो रही हो, ऐसे क्षेत्र कानूनी तौर पर रिजर्व घोषित किए जाते है l

·     भारत में कुल 18 जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र है l

 

1.नीलगिरी तमिलनाडु,  केरल (1986)

2.नंदा देवी - उत्तराखंड

3.नोकरेट - मेघालय

4.मानस - असम

5.सुंदरबन- पश्चिम बंगाल

6.मन्नार की खाड़ी - तमिल नाडु

7.ग्रेट निकोबार - अंडमान

8.सिमलीपाल - उड़ीसा

9.डिब्रूगढ़ - असम

10.                   देहांग या दिवांग - अरुणाचल प्रदेश

11.                   पंचमढ़ी - मध्यप्रदेश

12.                   कंचनजंगा - सिक्किम

13.                   अगस्त मलाई - केरल

14.                   अचानकमार (अमरकंटक) मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़

15.                   कच्छ का रण - गुजरात

16.                   कोल्ड डेजर्ट - हिमाचल प्रदेश

17.                   शेषाचलम पहाड़िया - आंध्र प्रदेश

18.                   पन्ना - मध्य प्रदेश (2014)

नोट :- भारत का सबसे पहला जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र नीलगिरी तमिलनाडु और केरल में है जो कि 1986 में जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था l

और पन्ना (मध्य प्रदेश) सबसे आखरी का जैव मंडल आरक्षित क्षेत्र अब तक का घोषित है,  जो कि 2014 में घोषित किया गया था l

 

जैव विविधता  (BIO- DIVERSITY)

 जिस प्राकृतिक स्थल में विभिन्न प्रजातियों के जीव जंतु एवं वनस्पतियों का समूह हो,  ऐसे क्षेत्र को जय विविधता कहते हैं l ऐसे क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं l

·     जैव विविधता शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम ईoo विल्सन ने 1986 में किया था l

 

·     जैव विविधता सर्वाधिक उष्ण एवं अlर्द जलवायु में पाई जाती है l

 

·     विश्व में सर्वाधिक जैव विविधता ‘ब्राजील’ में पाई जाती है l

 

·     सबसे कम जैव विविधता एवं शुष्क मरुस्थल में पाई जाती है l

 

 

·     भारत में सर्वाधिक जैव विविधता शांत घाटी केरल में पाई जाती है l



·     विश्व की कुल जैव  विविधता का सात से आठ प्रतिशत जैव विविधता भारत में पाई जाती है l

 

 संवेदनशील स्थल

(HOT- SPOT)

 

जय विविधता से परिपूर्ण स्थलों का विनाश मानव की आर्थिक क्रियाओं द्वारा किया जा रहा हो तो ऐसे स्थल को हॉटस्पॉट या संवेदनशील स्थल कहा जाता है l

·    


विश्व में कुल 38 हॉटस्पॉट स्थल है l

 

·     जिसमें से दो हॉटस्पॉट स्थल भारत में है :-

·     पश्चिमी घाट - मानव द्वारा इंडस्ट्री लगाने के कारण पश्चिम घाट हॉटस्पॉट स्थल घोषित हो गया है l

1.     पूर्वी हिमालय झूमिंग कृषि (जिसे स्थानांतरण शील कृषि भी कहा जाता है),  की प्राचीन परंपरा के कारण पूर्वी हिमालय हॉटस्पॉट मैं आता है l

 

 

बायोम (BIOM)

 जैव मंडल एक व्यापक क्षेत्र होता है जबकि बायोम जलवायु,  तापमान,  वर्षा और स्थलाकृति के अनुसार विभाजित होता हैजैसे :-

·     मरुस्थलीय बायोम

·     टुंड्रा बायोम

·     टैगा बायोम

·     नदी बायोम या सागरीय  बायोम आदि l

 

 

पर्यावरण

 हमारे चारों ओर से घिरा हुआ आवरण पर्यावरण कहलाता है आर्टिकल 48A  में पर्यावरण का प्रावधान दिया गया है l 

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के अनुसार इससे चार भागों में बांटा गया है l

·         वायुमंडल हमारे चारों ओर स्थित वायु जो आवरण बनाती है इसे हम वायुमंडल कहते हैं l

 

·         स्थलमंडल :   हमें जो अपने आसपास प्राकृतिक चीजें दिखती है उसे हम स्थल मंडल में शामिल करते हैं जैसे पेड़-पौधे जीव जंतु  आदि l

·         जलमंडल :  जल में रहने वाली चीजें चाहे वह प्राकृतिक वनस्पति हो,  या जीव-जंतु हो,  या जो भी चीजें जल में रहती हैं,  उन्हें  जल मंडल में माना जाता   है l

·         जैव मण्डल : मंडल धरती से लेकर आकाश तक जितने भी सूक्ष्म या बड़े जीव इस प्रकृति में मौजूद है उसे हम जैव मंडल में शामिल करते   हैं l

 

 

कुछ महत्वपूर्ण दिवस व अधिनियम 

·         विश्व पर्यावरण दिवस - 5 जून

·         विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस - 26 नवंबर

·         राष्ट्रीय प्रदूषण रोकथाम दिवस - 2 दिसंबर 

·         विश्व वन्यजीव दिवस 5 मार्च 

·         विश्व जैव विविधता  दिवस - 22 मई

·         विश्व जल दिवस- 22 मार्च

·         पृथ्वी दिवस - 22 अप्रैल

·         विश्व स्वास्थ्य दिवस - 7 अप्रैल

·         वन संरक्षण अधिनियम - 1980

·         वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972

·          जल संरक्षण एवं प्रदूषण अधिनियम 1974

·          वायु संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम - 1981

·          कीटनाशक प्रदूषण अधिनियम - 1968

·          जैव विविधता संरक्षण अधिनियम 2002

 

 

 

 कुछ महत्वपूर्ण संधि व सम्मेलन

 

·          वियना समझौता 1985 - वियना समझौता में ओजोन परत संरक्षण के लिए बात की गई l

·         मोंट्रियल प्रोटोकोल 1987 ओजोन परत संरक्षण संधि हुई थी l

·          स्टॉकहोम सम्मेलन 1972  इसी समय 5 जून को पर्यावरण दिवस घोषित हुआ

 

कुछ महत्वपूर्ण स्थल

·         पर्यावरण अनुसंधान संस्थान - नागपुर

·         पर्यावरण शिक्षा केंद्र - अहमदाबाद 

·         वन अनुसंधान संस्थान - देहरादून 

·         वन्यजीव अनुसंधान संस्थान देहरादून

 

 

प्रसिद्धि प्राप्त भारतीय व्यक्ति

·         भारत में पारिस्थितिकी तंत्र के जन्मदाता - डॉक्टर रामदेव मिश्रा

·         डॉल्फिन मैन ऑफ इंडिया - रविंद्र कुमार सिन्हा

·         टाइगर मैन ऑफ इंडिया - कैलाश सांखला