G-7 : जी-7 की बैठक में चीन पर कार्रवाई को लेकर संशय क्यों है।

G- 7 : जापान के हिरोशिमा में जी-7 देशों की बैठक हो रही है। अमेरिका सहित जी-7 के सदस्य देश रूस के यूक्रेन पर हमले और चीन के विस्तार के दो अहम मुद्दों पर चर्चा के लिए हिरोशिमा में जमा हुए हैं। लेकिन इसके साथ ही एक और मुद्दा पहली बार 19- 21 मई की बैठक में है। यह है जीपीटी-4 जैसे एआई आधारित प्रोग्राम के इस्तेमाल को लेकर रेगुलेशंस पर एकराय कायम करना। अमेरिका, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, इटली के इस जी-7 समूह के कार्यक्रम में जापान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को भी विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया है।.

रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर जी-7 में क्या मुद्दा है?

जी-7 का सबसे प्रमुख मसला यूक्रेन पर रूस का हमला है। रूस के हमलों में पलटवार में तेजी ला रहे यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई बढ़ाने के तरीकों को लेकर कुछ मतभेद हैं। जी 7 यूक्रेन को रूस की रणनीतिक हार के रूप में दिखाने पर काम कर रहा है। बाइडेन और उनके सहयोगियों ने व्यापक रणनीति के तहत इसमें भारत और कुछ अन्य देशों को शामिल किया है जो अब तक इस मुद्दे पर तटस्थ बने हुए हैं। वहीं कुछ सदस्य देश यूक्रेन को तेजी से आधुनिक हथियार पहुंचाने के पक्ष में हैं तो बाइडेन कुछ सुस्त पड़ रहे हैं। कुछ देश यूक्रेन को एफ- 16 लड़ाकू विमानों की ट्रेनिंग देने के पक्ष में हैं। बाइडेन हिचकिचाहट के बाद इस पर राजी हुए हैं।

चीन को लेकर क्या मतभेद हैं?

चीन के संबंध में भी जी-7 समूह के देशों में चिंता है लेकिन इस पर कार्रवाई को लेकर मतभेद हैं। कारण सभी सदस्य देशों के हित चीन के साथ मजबूत संबंधों से जुड़े हुए हैं। क्लाइमेट जैसे मुद्दों पर चीन का सहयोग भी जरूरी है। ऐसे में असमंजस है कि उसके साथ क्या रणनीति हो। चीन की दूसरे देशों के हितों के खिलाफ नीतियों के बदले में वे एक संयुक्त रणनीति तय करना चाहते हैं।

हिरोशिमा में क्यों हो रहा है समिट ?

जापान की राजधानी टोक्यो की बजाय बैठक हिरोशिमा में रखी गई है जो पहले परमाणु हमले का गवाह रहा है। 6 अगस्त 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया था। इसमें लाखों लोग मारे गए थे। जापान के पीएम फूमियो किशिदा इस समिट से परमाणु हथियार रहित दुनिया की जरूरत का संदेश देना चाहते हैं।

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